शिक्षण कौशल का अर्थ एवं अवधारणा

 एनएल डॉक्स के शब्दों में " शिक्षण कौशल में विशिष्ट अनुदेशात्मक क्रियाएँ और मूल बातें शामिल हैं जिनमें शिक्षक कक्षा कक्ष में अपने शिक्षण को प्रभावी बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। ये शिक्षण के विभिन्न चरण से संबंधित हैं। तथास्तु ये शिक्षक के सतत प्रयोग में हैं। ''

डॉ वी के पासी के "शिक्षण कौशल छात्रों के सीखने के लिए सहजता प्रदान करने के विचार से संबंधित शिक्षण अभ्यास क्रियाओ या व्यवहार विश्वविद्यालय के समूह हैं।"
मूल रूप से यह कहा जा सकता है कि शिक्षण कौशल शिक्षक के हाथ में शास्त्र वह अपना प्रयोग करके शिक्षक अपने कक्ष में शिक्षण को सक्रिय और क्रियाशील बनाता है और कक्षा की अंत प्रक्रिया में सुधार लाने का प्रयास करता है।

                   शिक्षण कौशल की विशेषताएं 
          (शिक्षण कौशल की सुविधाएँ)
1. शिक्षण कौशल शिक्षक कोचिंग और व्यवहार शिक्षक से संबंधित होते हैं।
2. शिक्षण कौशल कक्षा शिक्षण अभ्यास से संबंधित होते हैं
3. शिक्षण कौशल शिक्षा के विशिष्ट लक्ष्यो की प्राप्ति में सहायक होता है।
4. शिक्षण कौशल शिक्षण प्रक्रिया को प्रभावशाली बनते  हैं।
5. शिक्षण कौशल के माध्यम से विषय -वस्तु  विद्यार्थियों को सरलता
 एवं सुगमता से सीखा सकते है।
                 सूक्ष्म-शिक्षण में शिक्षण कौशल 
(Teaching Skills in Micro-Teaching)
सूक्ष्म शिक्षण, शिक्षण कौशलों पर आधारित होता है। स्टेंन फोर्ड विश्वविद्यालय तथा कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय ने क्रमशः14  तथा 18 शिक्षण कौशलों की सूची तैयार की है। भारतवर्ष में एम एस विश्वविद्यालय बरोदा ने 21 शिक्षण कौशलों की सूची तैयार की।
NCERT द्वारा चयनित 5 महत्वपूर्ण शिक्षण कौशलों का विवरण निम्नलिखित हैं-
1. खोजक प्रश्न कौशल(Skill of Probing Questions)

शिक्षक जब कक्षा में पाठ के विकास के लिए प्रश्न पूछता है या छात्रों के पूर्व ज्ञान की जाँच के लिए प्रश्न करता है, तब छात्र उत्तर देने में समर्थ नहीं होते हैं, ऐसी स्थिति में शिक्षक छात्रों से सही उत्तर निकालने के लिए कुछ खोजपूर्ण प्रश्नों की सहायता लेता है जिससे छात्रों को सही उत्तर ढूँढ़ने में सहायता मिलती है।शिक्षक छात्रों में रुचि एवं जिज्ञासा उत्पन्न करके ऊनके पूर्व ज्ञान को नवीन ज्ञान से जोड़ता हैं। छात्र चिंतनशील होकर गहराई में जाते हैं और विभिन्न पहलुओं पर ध्यान पूर्वक मंथन करते हैं।
खोजपूर्ण प्रश्न कौशल के घटक (Components of Skill of Probing Questions)
1. संकेत देना (Prompting)
2.विस्तृत सूचना प्राप्ति (Seeking Further Information)
3.पुनः केन्द्रीयकरण (Refocusing)
4.पुनः प्रेषण (Redirection)
5.आलोचनात्मक सजगता (Critical Awareness)

संकेत देना- शिक्षक जब कक्षा में प्रश्न पूछता है तो उसे कई बार नकारात्मक उत्तर प्राप्त होता है जैसे मुझे नहीं पता, मैं नहीं जानता, ठीक उत्तर नहीं आता तो शिक्षक संकेत देकर उन्हें सही उत्तर देने के लिए प्रेरित करता है।
विस्तृत सूचना प्राप्ति - जब छात्र अधूरा उत्तर देता है तो शिक्षक पूर्ण उत्तर प्राप्ति के लिए प्रयास करता है इसके लिए शिक्षक कहता है तुम ठीक कह रहे हो, हां यह बात स्पष्ट करो, कुछ और बताओ, इसमें एक महत्वपूर्ण बात और है, जरा सोचो वह कौन सी है। इस प्रकार शिक्षक विस्तृत सूचना प्राप्ति घटक का प्रयोग करता है।
पुनः केन्द्रीयकरण - जब शिक्षक पूर्ण उत्तर प्राप्त कर लेता है तब प्राप्त ज्ञान को नवीन विषय वस्तु से जोड़ने का प्रयास करता है इसे पुनः केंद्रीय कारण कहा जाता है।
पुनः प्रेषण - इसके अंतर्गत शिक्षक एक ही प्रश्न को कई छात्रों से पूछता है इस प्रकार वह पुनः प्रेषण का कार्य करता है।
आलोचनात्मक सजगता - अंत मे शिक्षक सही उत्तर पाने के पश्चात छात्रों से उत्तर की सार्थकता बताने के लिए कहता है यही आलोचनात्मक सजगता कहलाती है।

स्पष्टीकरण का कौशल या व्याख्या कौशल (Skill of Explaining)

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