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नीचे दिए गए अनुच्छेद को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनिए ।  मेरा थोड़ा बहुत संबंध साहित्य की दुनिया से भी है। यही हालात में यहां भी देखता हूं। यूरोपीय साहित्य का फैशन हमारे उपन्यास कारों, कहानी, लेखकों और कवियों पर झूठ हावी हो जाता है ।मैं अपने प्रांत पंजाब की बात करता हूं । मेरे पंजाब में युवा कवियों की नई पौध सामाजिक व्यवस्था खिलाफ इंकलाबी जज्बे से ओतप्रोत है। इसमें भ्रष्टाचार ,अन्याय, शोषण को हटाने और एक नई व्यवस्था बनाने की बात की गई है। हां, हमें सामाजिक बदलाव की जरूरत है और इन कविताओं में बातें तो बहुत अच्छे ढंग से कही गई है पर इनका स्वरूप देसी नहीं है। इस पर पश्चिम का प्रभाव है ।परिणाम यह है कि यह सारा इंकलाब एक छोटे से कागज पर सीमित रह जाता है। बस, साहित्यिक समझ रखने वाले एक छोटे से समूह में इनकी बात होती है। किसान, मजदूर जो शोषण को झेल रहे हैं, जिन्हें वे इंकलाब की प्रेरणा देना चाहते हैं ,वह इसे समझ नहीं पाते हैं। इस साल मेरी मातृभूमि पंजाब में मुझे गुरु नानक विश्वविद्यालय के सीनेट का सदस्य बनाने के लिए नामित किया गया। जब मुझे उसकी पहली मीटिंग...

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  नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्रश्न संख्या 1 से 8 )के सही सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए। " भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ। इस आजादी के लिए पूरे देश की जनता ने एक लंबा और मुश्किल संघर्ष चलाया था। इस संघर्ष में समाज के बहुत सारे तबकों की हिस्सेदारी थी। तरह-तरह के पृष्ठभूमि के लोगों ने इसमें भाग लिया। वे स्वतंत्रता, समानता तथा निर्णय प्रक्रिया में हिस्सेदारी के विचारों से प्रेरित थे । औपनिवेशिक शासन के तहत लोग ब्रिटिश सरकार से भयभीत रहते थे। वे सरकार के बहुत सारे फैसले से असहमत थे। लेकिन अगर वे इन फैसलों की आलोचना करते तो उन्हें भारी खतरो का सामना करना पड़ता था। स्वतंत्रता आंदोलन ने यह स्थिति बदल डाली। राष्ट्रवादी खुलेआम ब्रिटिश सरकार की आलोचना करने लगे और अपनी मांगे  पेश करने लगे। 1885  में ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने मांग की कि विधायिका में निर्वाचित सदस्य होने चाहिए और उन्हें बजट पर चर्चा करने एवं प्रश्न पूछने का अधिकार मिलना चाहिए ।1909 में में बने गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट में कुछ हद तक निर्वाचित प्रतिनिधित्व की व्यवस्था को मंजूरी दे दी ...