शिक्षा के मौलिक अधिकारों के अनुपालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले घटक

 शिक्षा के मौलिक अधिकारों के अनुपालन में किन की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है?

शिक्षा के मौलिक अधिकारों का अनुपालन में सरकार, विद्यालय, शिक्षक ,एवं समुदाय सभी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

शिक्षा का अधिकार और 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों के लिए एक मौलिक अधिकार है। सरल शब्दों में इसका अर्थ यह है कि सरकार प्रत्येक बच्चे को आठवीं कक्षा तक की निशुल्क पढ़ाई के लिए उत्तरदाई होगी, चाहे वह बालक हो अथवा बालिका अथवा किसी भी वर्ग का हो। इस अधिनियम में सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और अनिवार्य शिक्षा प्रदान का प्रावधान है , जिससे ज्ञान कौशल और मूल्यों से लैस करके उन्हें भारत का प्रबुद्ध नागरिक बनाया जा सके।  यदि विचार किया जाए तो आज देश भर में स्कूलों में वंचित लगभग एक करोड़ बच्चों को शिक्षा प्रदान करना सचमुच हमारे लिए एक दुष्कर कार्य हैं । इसलिए इस लक्ष्य को साकार करने के लिए सभी हित कारको-- माता-पिता, शिक्षक स्कूलों, गैर- सरकारी संगठनों और कुल मिलाकर समाज, राज्य सरकारों और केंद्र सरकार की ओर से एकजुट प्रयास का आह्वान किया गया है।

इन मौलिक अधिकार के अनुपालन में स्कूलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है क्योंकि स्कूलों को 5 वर्षों के भीतर अपने सभी शिक्षकों को प्रशिक्षित करना होगा । उन्हें 3 वर्षों के भीतर समुचित सुविधाएं भी सुनिश्चित करनी होगी, जिससे खेल का मैदान, पुस्तकालय, पर्याप्त संख्या में अध्ययन कक्ष, शौचालय ,शारीरिक विकलांग बच्चों के लिए निर्बाध पहुंच तथा पेयजल सुविधाएं शामिल है। स्कूल प्रबंधन समितियों के 75% सदस्य छात्रों की कार्यप्रणाली और अनुदानो के इस्तेमाल की देखरेख करेंगे। स्कूल प्रबंधन समितियां अथवा स्थानीय अधिकारी स्कूल से वंचित बच्चों की पहचान करेंगे और उन्हें समुचित प्रशिक्षण के बाद उनकी उम्र केअनुसार समुचित कक्षाओं में प्रवेश  दिलाएंगे। सम्मिलित विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अगले वर्ष से निजी स्कूल में सबसे निचली कक्षा में समाज के गरीब और हाशिए पर रहने वाले वर्गों के लिए 25% सीटें आरक्षित करेंगे।

यह समुदाय , माता-पिता की भी जिम्मेदारी है कि वे स्कूल जाने की उम्र तक के अपने सभी बच्चों को निशुल्क सरकारी स्कूलों में नामांकन करवाएं और शिक्षा के बेहतर माहौल को बढ़ावा दें।  कक्षाओं के बेहतर संचालन एवं विद्यालय समितियों के बेहतर प्रशासन में अपना सहयोग दें। शिक्षकों का दायित्व है कि वह कक्षा में समानता एवं सहयोग को बढ़ावा दें। सभी बच्चे चाहे वह लड़का हो या लड़की, सामान्य हो या सभी को एक समान शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराएं। शिक्षा चुकी अब हर बच्चे का मौलिक अधिकार है। अतः इसके अनुपालन में इन सभी की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।


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