विकास की अवस्थाएँ(Stages of Development)

 बाल - विकास की प्रक्रिया का वर्णन करते समय विकास की विभिन्न अवस्थाओं (सोपानों)पर विचार करना आवश्यक है । यद्यपि विचारकों  में विकास के विभिन्न सोपानों(Stages) के विषय में मतभेद है किंतु सामान्य रूप से सभी ने मानव विकास को निम्नांकित अवस्थाओ में विभाजित किया है:-

1. प्रारंभिक बाल्यकाल जन्म से 12 वर्ष की आयु तक।

2. पूर्व किशोरावस्था 12 से 16 वर्ष की आयु तक ।

3. किशोरावस्था 16 से 21 वर्ष की आयु तक।

4. व्यस्कावस्था 21 वर्ष के बाद ।

कुछ मनोवैज्ञानिकों ने प्रारंभिक बाल्यकाल को निम्नलिखित शीर्षकों में विभाजित किया है:-

1. शैशव(Infancy)- जन्म से 3 वर्ष की आयु तक

2.पूर्व बाल्यकाल (Pre-Childhood) - 3 वर्ष से 6 वर्ष की आयु तक।

3. उत्तर - बाल्यकाल ( Late Childhood) -6 से 12 वर्ष की आयु तक ।

उपर्युक्त अवस्थाओं का सुविधाजनक अध्ययन करने के लिए डॉ. अर्नेस्ट जोन्स (Dr. Earnest jones) द्वारा किया गया विकास की अवस्थाओं का विभाजन अधिक उपयुक्त माना गया है । इनके  अनुसार मनुष्य का विकास 4 सुस्पष्ट अवस्थाओं में होता है:-

1. शैशवावस्था (Infancy) - जन्म से 5 या 6 वर्ष,

2. बाल्यावस्था (Childhood) - 6 से 12 वर्ष तक,

3.किशोरावस्था (Adolescence)- 12 से 18 वर्ष तक,

4. प्रौढ़ावस्था (Maturity of Adulthood) - 18 वर्ष के बाद

शिक्षा की दृष्टि से प्रथम तीन अवस्थाओं का विशेष महत्व है।

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